भारत का इतिहास

भारत का इतिहास : शैक्षणिक और आर्थिक क्षति

भारत का इतिहास: प्रस्तावना

भारत का इतिहास विश्व के सबसे प्राचीन, समृद्ध और ज्ञान-प्रधान इतिहासों में गिना जाता है।विशेषकर प्राचीन भारत – आर्यभट्ट, वराहमिहिर, पाणिनि, चाणक्य, सुश्रुत, नागार्जुन, आदि महापुरुषों के कारण – दुनिया का ज्ञानप्रकाश कहलाता था।

भारत का इतिहास
History of India

लेकिन 8वीं सदी से लेकर 18वीं सदी तक आए विभिन्न अधिकारी, सेनाएँ, तुर्की-अफगानी-मध्य एशियाई आक्रमणकारी और बाद में मुगल साम्राज्य की नीतियों ने भारत की शिक्षा, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और स्वायत्तता पर गहरा प्रभाव डाला।

इस से यह पता चलता है कि कैसे भारत की शक्ति, समृद्धि और शिक्षा—लगातार बाहरी आक्रमणों, युद्धों और कर-व्यवस्थाओं के कारण कमजोर होती गई।

भाग 1: भारत—एक स्वर्णभूमि

भारत क्यों लक्ष्य बना?

प्राचीन एवं मध्यकालीन यात्रियों ने भारत को “सोन की चिड़िया” कहा।

इसके कुछ प्रमुख कारण:

  1. विशाल कृषि उत्पादन
  2. विश्व का सबसे बड़ा मसाला व्यापार
  3. उच्च गुणवत्ता का स्टील (वूट्ज़ स्टील)
  4. विश्व प्रसिद्ध वस्त्र उद्योग (धागा, रेशम, मलमल)
  5. मंदिरों में संरक्षित विशाल संपत्ति
  6. शिक्षा केंद्रों की संपन्नता
  7. भारत दुनिया का ऐसा देश था जहाँ, विश्वविद्यालयों में 10,000 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते थे ।
  8. वैज्ञानिक व गणितीय ज्ञान निर्यात होता था ।
  9. व्यापारिक घाटे पश्चिमी देशों को परेशान करते थे ।

इसी संपन्नता ने भारतीय उपमहाद्वीप को लगातार आक्रमणों का मुख्य लक्ष्य बनाया।

भाग 2: प्राचीन शिक्षा केंद्रों का विनाश

1. नालंदा विश्वविद्यालय

दुनिया का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय ; नालंदा — जहाँ चीन, कोरिया, इंडोनेशिया, सीरिया आदि देशों के छात्र पढ़ते थे।आक्रमणों के दौरान:

  1. विशाल पुस्तकालय “धर्मगंज” जलाया गया
  2. लाखों पांडुलिपियाँ राख में बदल गईं
  3. हजारों विद्वान मारे गए या भाग गए
  4. वैज्ञानिक शोध का आधार टूट गया ।

इतिहासकारों के अनुसार नालंदा का ग्रंथागार 3 महीने तक जलता रहा।

2. तक्षशिला विश्वविद्यालय

  • प्राचीन भारत का सबसे बड़ा,
  • बहुविषयक शिक्षा केंद्र,
  • आक्रमणों के दौरान बौद्ध विहार, पुस्तकालय, छात्रावास नष्ट
  • ब्राह्मी, संस्कृत, बौद्ध धर्म के करोड़ों पन्ने समाप्त

3. विक्रमशिला, ओदंतपुरी, पुश्यमित्रा, सोमनाथ और काशी की शिक्षाशालाएँ

  • लगातार युद्धों और आक्रमणों से इन संस्थानों की सभी शैक्षणिक गतिविधियाँ समाप्त हो गईं।
  • भारत की शिक्षा प्रणाली मूल रूप से प्राइमरी से विश्वविद्यालय तक टूट गई।

भाग 3: मंदिरों का विनाश और सांस्कृतिक क्षति

मंदिर केवल पूजा स्थल नहीं थे—वे:

  1. विश्वविद्यालय
  2. पुस्तकालय
  3. विज्ञान केंद्र
  4. आर्थिक गतिविधि के केंद्र
  5. सामाजिक संस्थाएँ भी थे।

जब मंदिर नष्ट हुए, तब केवल धर्म नहीं, भारत की वैज्ञानिक-सांस्कृतिक रीढ़ भी टूटी।

मंदिरों के विनाश के प्रमुख प्रभाव:

  1. मंदिरों में संग्रहित सोने-चांदी की लूट
  2. शिल्प, वास्तुकला, मूर्तिकला की परंपराओं का ह्रास
  3. स्थानीय कारीगरों का पलायन या समाप्ति
  4. शिक्षकों और विद्यार्थियों की हत्या या दमन
  5. गाँवों में आर्थिक तंत्र का ध्वंस ।

भाग 4 : शिक्षा का पलायन और विज्ञान का पतन ।

जब विश्वविद्यालय जले, शिक्षक मारे गए, पुस्तकालय समाप्त हुए—तब भारत का वैज्ञानिक आधार टूट गया।

भारत में: खगोलशास्त्र, गणित, चिकित्सा, धातु विज्ञान, नौसेना, तकनीक, जल प्रबंधन, नगर नियोजन, सब क्षेत्रों में प्राचीन श्रेष्ठता थी।

लेकिन लगातार युद्धों से—वैज्ञानिक समर्थन बंद हुआ । शिक्षा संस्थाएँ नष्ट हुईं। प्रतिभाशाली लोग पलायन कर गए। गुरुकुल व्यवस्था टूट गई। ज्ञान ट्रांसफर रुक गया। भारत जहाँ दुनिया को विज्ञान सिखाता था, वहाँ विज्ञान विदेश चला गया।

भाग 5 : आज भी महसूस होते प्रभाव

भारत आज भी उन सदियों की क्षति से उभर रहा है।

  1. शिक्षा : विश्वविद्यालयों का पुनर्निर्माण 2000 साल बाद हो रहा है शोध परंपरा आज भी वैसी नहीं ।
  2. आर्थिक : उपनिवेशवाद तक भारत आर्थिक रूप से कमज़ोर स्थिति में था ।
  3. सांस्कृतिक : कई प्राचीन संस्कृतियाँ लुप्तकई ग्रंथ, पांडुलिपियाँ हमेशा के लिए खो गईं।
  4. सामाजिक : विभाजन और सामाजिक विखंडन आज तक प्रभाव डालता है ।
भारत का इतिहास

भारत का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है, लेकिन लगातार बाहरी आक्रमणों, युद्धों, और लूट के कारण भारत आज पुनः उभर रहा है—लेकिन यह तथ्य स्पष्ट है कि यदि मध्यकालीन शताब्दियों में भारत पर इतने आक्रमण न होते—➡ तो भारत आज दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति होता।

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