एक ईमानदार व्यापारी की अनोखी कहानी
एक समय की बात है, आरव नाम का एक युवा और नेकदिल व्यापारी काम की तलाश में सुंदरपुर नाम के गाँव में आया। गाँव के लोगों की सरलता उसे इतनी भा गई कि उसने वहीं बसने का फैसला कर लिया।
घर की तलाश में उसकी मुलाकात हरिनारायण नाम के एक गरीब युवक से हुई। हरिनारायण का परिवार पहले बहुत अमीर ज़मींदार था, लेकिन अब वे कर्ज़ में डूबे थे। कर्ज़ चुकाने के लिए वह अपना पुराना पुश्तैनी मकान बेचना चाहता था।
आरव को वह घर बहुत पसंद आया और उसने तुरंत ख़रीद लिया।
जमीन के नीचे मिला रहस्यमयी बक्सा

घर की मरम्मत करते समय, पुराने फर्श को हटाते हुए आरव को मिट्टी में दबा हुआ एक सील किया हुआ बक्सा मिला। उत्सुकता से उसने बक्सा खोला, लेकिन अंदर बिच्छू भरे हुए थे! घबराकर उसने बक्सा दूर फेंक दिया।
उस शाम वह गाँव के सबसे बुद्धिमान बुज़ुर्ग के पास पहुँचा और पूरी कहानी सुनाई।
बुज़ुर्ग ने कहा, “शायद हरिनारायण के पूर्वजों ने इस बक्से में धन छुपाया होगा। एक पुराने जादुई मंत्र के कारण यह बक्सा परिवार से बाहर किसी को बिच्छुओं से भरा दिखाई देता है। केवल असली वंशज ही इसे धन से भरा देख सकता है।”
आरव यह सुनकर उदास हो गया। अगर हरिनारायण को यह बात पहले पता होती, तो वह अपना घर नहीं बेचता।
ईमानदारी की मिसाल – आरव का निर्णय
आरव ने निश्चय किया कि वह बक्से को संभालकर रखेगा, जब तक हरिनारायण के परिवार का कोई सदस्य उसे लेने न आ जाए।सच्चे वंशज की पहचान के लिए उसने बक्से में से चार बिच्छू निकाले और अपनी नई दुकान के चार कोनों में टांग दिए।
लोग हँसते और उसे पागल कहते, लेकिन आरव परवाह नहीं करता था। उसकी दुकान धीरे-धीरे बिच्छू वाली दुकान के नाम से मशहूर हो गई।
वर्षों बाद आई उम्मीद की किरण
कई साल बीत गए। अब आरव का परिवार था, पैसे थे, लेकिन दिल में एक दुख—आज तक कोई भी उस बक्से को लेने नहीं आया।
एक दिन एक युवक उसकी दुकान में आया।
वह बोला,”सर, मैं गरीब हूँ और स्कूल की फीस नहीं भर पा रहा। क्या आप थोड़े पैसे उधार देंगे?”
आरव ने दुखी होकर कहा कि वह उतना अमीर नहीं है।
यह सुनकर लड़का नाराज़ हो गया—”अगर आप गरीब हैं तो दुकान के कोनों में सोने के सिक्के क्यों लटकाए हैं?”
आरव चौंक गया! जिसे वह बिच्छू समझता था, वह लड़का सोने के सिक्के देख रहा था।यह वही संकेत था जिसका वह वर्षों से इंतज़ार कर रहा था।
सच्चा वारिस मिला
आरव ने उत्साहित होकर पूछा,”क्या तुम हरिनारायण के परिवार से हो?”
लड़के ने आश्चर्य से कहा,”हाँ, मेरा नाम भी हरिनारायण है। मेरे दादा इसी गाँव में रहते थे।”
आरव आँसू रोक न पाया।वह दौड़कर घर गया और पुराना बक्सा लाकर लड़के को दिया।
लड़के ने बक्सा खोलते ही देखा—वह सोने-चांदी के खजाने से भरा था!
आरव मुस्कुराया,”यह तुम्हारे पूर्वजों का धन है। इसे समझदारी से उपयोग करो और जीवन में आगे बढ़ो।”
लड़के ने आधा धन देने की पेशकश की, लेकिन आरव ने मना कर दिया।
कहानी का संदेश (Moral of the Story)
- ईमानदारी हमेशा जीतती है।
- जो दूसरों के लिए अच्छा करता है, उसे जीवन में अच्छा जरूर मिलता है।
- खजाना धन का नहीं, चरित्र का होता है |
